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Top 100 Best 1 Line Status / Shayari For Whatsapp 2016 In Hindi

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Top 100 Best 1 Line Status / Shayari For Whatsapp 2016 In Hindi

>  गंगा का पानी छिड़क दो ख़त पर, भटकती रूह है उसमें मेरे अल्फ़ाज़ों की.. 

>  तुम्हारे लैंडलाइन की पास वाली दीवार पे लिखा जो कई रंगो से पुत गया ...
हाँ वही रॉंग नंबर हूँ मैं....

>  दिल की किताब से इस मसले का हल ढूंढो, 
क्या सही है.. अपने प्यार को बेवफ़ा कहना..?तु

>  जाड़ों की नर्म धूप और आँगन में लेटकर.. आँखों पर खींच कर तेरे दामन के साये को.. औंधे पड़े रहें कभी क़रवट लिये हुए...

>  क़ाश कि तुम भी कभी यूं ही समेट लो मुझे तो जिस्म से लेकर रूह तक जमा हर इक दर्द पिघल जाये...क़ाश...

>  चंद लम्हों के लिए एक मुलाक़ात रही,
फिर न वो तू, न वो मैं, और न वो रात रही...

>  वो, जहाँ, आख़िरी साँस रहा करती है.. मैंने चुपचाप
तुम्हें रख लिया, वहीं पे कहीं...

> मोहब्बत की खातिर चुराया हुआ मेरी जेब में रखा बिस्कुट का वो टुकड़ा चूरा-चूरा होने को है। मुझे वो बिस्कुट तुम्हे खिलाना था…..

> ढलने लगी है रात बोझिल सी आँख में,
यादों के वो तिलिस्म सिरहाने पे आ गए….

> उसकी आँखें बड़ी बक बक करती थी….

> बड़ी नम होती हैं रात की ये हवाएँ, झूठ कहती है वो लड़की कि अब वो रोती नहीं….

> मेरी साँस सुलगने लगती है… मुझे इश्क़ दिलासे देता है…….

> जब चांद ठीक आँगन के बीच में आ जाए तब देखना…

> साथ चलेंगे उस मोड़ तक जहाँ से तुम किसी और का हाथ थाम आगे चली जाओगी… मैं पीछे आऊंगा उस हाथ को थामने जिसे छोड़ मैं आगे चला गया था… उस मोड़ तक….

> हल्की हल्की आहें भरना… तकिये में सर दे कर धीमे धीमे…..

> उसके ज़हन में अब न सपने हैं न सपनों की किरचे, कुछ है तो बस जमा हुआ एक कतरा खून जो कभी उसके सपने से रिसकर बहने से बचा रह गया था…..

> लम्बी रातें…

> रात को वे एक-दूसरे को अपनी ज़िन्दगी की कहानियां कहते।अपने असफल प्रेम के किस्से सुनाते और अपनी अनकही बातों को कह देते….

> और प्रेम में होना सिर्फ़ हाथ थामने का बहाना ढूँढना नहीं होता… दो लोगों के उस स्पेस में बहुत कुछ टकराता रहता है…..

> मुस्कुराइए…

> बेवजह शुक्रिया कह देता हूँ बच्चों को…..
सुना है इन्हें आदतें जल्दी लगती हैं…….


> जब इश्क़ लिखूँ मैं,
लफ़्ज़ों से छनो तुम….

> पत्नी कोमा के कारण ICU में है… पति का रो-रोकर बुरा हाल है… अब तो सब कुछ भगवान के हाथ में है… पति बोल उठा, सिर्फ 40 की ही तो है अभी… तभी पत्नी के होंठ हिले और आवाज आई, 36 की… और सन्नाटा पसर गया….

> चलो सबसे महंगा सौदा करते हैं…. वो जो सुबह की नींद हैं ना, मुझे बहुत ही प्यारी हैं, हाँ …. उस के बदले…..

> मैं जिस को तकता हूँ ,
हर वक्त दिल की नजर से ,
वो चाँद तो किसी और आसमां का है….

> सुबह सुबह जब कभी वो उस मोड़ पर दिख जाती हैं तो गफ़लत में ये समझ नहीं आता कि उसके आगे चलु कि पीछे…..?

> तेरा दीदार मिले तो शायरी हो…
वरना मैं शायर नहीं, इंतज़ार होता हूँ….

> काश, हम होते एक ही हाथ में उंगलियां बनकर साथ-साथ रहते हरदम संग, वही गर्म चाय से लबालब कप पकड़ते हुए छू लेते एक दूसरे को, सहला लेते…

> चूड़ी पहनकर होंठों को एक दांत से दबाकर वो लड़की हंसी होगी और आँखों से काजल बहने लगा होगा… उन आँखों को किसी ने चूमा होगा न… ?

> एक मुक़ाम ऐसा आता है जब आपका साथी आपसे कह नहीं पाता पर महसूस करता है कि दोस्त… तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो पर आगे साथ चलना मुमकिन नहीं….

> वही खड़ा हूँ मैं… तुम्हारे ‘हाँ’ के इंतजार में, लौट के आना तो नज़रें मिला सको इतनी गुंजाइश रखना… वो प्रिय.. अलविदा ! तुम्हारी उड़ान के लिए…..

> अच्छे वक़्त के बुरे अनुभव के सलवटों पर नाम दर्ज़ है तुम्हारा… भूल जाने की पूरी सम्भावना है पर देर तक याद रहोगे > तुम…..

> चंद सुबहें और कईं शामें खर्ची हैं तुम्हारे साथ की ख़ातिर.. तुम्हारा साथ फिर बिके तो बताना जरूर…

> वो चौराहा जहाँ चार आँखो की गुफ़्तगु होती थी…
आज वहाँ दो आँखो मे इंतज़ार का मंज़र पाया गया……

> हर राह एक नए चौराहे पर ले जाती है… इंतजार की लत भी खत्म होती जा रही है… तुम जल्दी आना……..

> तुम कागजों पर और खूबसूरत दिखती हो…. यकीं नहीं, तो मेरी चंद नज़्में पढ़ लो….

> अब के जब लौटेगा वो तो फ़ासला रखेंगे हम…
ये इरादा उसके आते ही बदल जाता है क्यों…….

> मिलने की कोई सूरत नहीं इस कदर हो चले है अजनबी…
खुदा ही मिला दे तो शुक्र है वो खरीफ हुए और मैं रबी….

> कुछ लोग इश्क करते है…. कुछ लोगो को हो जाता है…

> कोई चिड़िया रास्ता भूलकर कमरे के अंदर आजाये…
तो पंखे बंद कर उसे रास्ता दिखाना भी मोहब्बत है…..

> सारे त्यौहार और मौसम.. उस एक शख़्स की मुट्ठी में रहते हैं…

> शुक्रिया ज़िन्दगी……

> उसे मालूम था कि उसके संग बाकी सबकुछ पीछे छूट रहा है मेरा….ख़ैर….

> वक्तो हालात के तकाज़े ने दोनों को लगभग एक सा तराशा था….. दोनों जानते थे सिर्फ प्रेम ही सब कुछ नहीं होता… याँ शायद नहीं जानते थे…..

> एक गज़ब की बात ये थी उन दोनों के बीच,के जब उनके बीच बोलने सुनने को कुछ न रह जाता,तब भी कुछ न कुछ हमेशा रह जाता बोलने सुनने को….

> लाल गुलाबों से होठों तक का व्यापार हुआ था उन दोनों में…..

> तपती दोपहर में छाँव हो जाना… उन दोनों के रिश्ते की ख़ासियत थी……

> लड़का उसके मोहल्ले में नई नई बिछी खड़ंजे की सड़क पे इस मोड़ से उस मोड़ तक टहलता था,लड़की बॉलकनी में आकर मुस्कुरा देती थी…..

> एक लड़की बहुत प्यारी सी… सपनों के धागों से बुनी…. नहाकर छत पर जब आती थी… फिर हौले से मुस्कुराकर आँखेँ झुकाती थी तो मेरे गाँव की उस ऊबड़-खाबड़ सड़क पर कायनात उतर आती थी…..

> जल्दी उम्मीद छोड़ देने की आदत थी लड़की की, लड़का मुड़ के वापस आया भी पर लड़की आज के दौर की थी… इश्क़,सदियों पहले वाला ही था…….

> “सिमटी खड़ी थी तुम.. और.. थामे हुआ था मैं…
लम्हा वो गुजरा सदियों तक… बस ज़िन्दगी मयस्सर न हुई…”

> ये सर्द रातें फिर बनी हैं डाकिया…तेरे अनलिखे ख़त मुझ तक पहुँचने लगे हैं….

> एक चाँद उगता है बहुत दूर के आसमान में.. ख़ामोश एक नदी बहती है एक पुराने-जर्जर पुल को पार करती हुई…..

> नीम के तले उस बूढ़े का मुर्दा जिस्म पड़ा था जिसने बचपन में उसे बोया था..
“चिता के लिऐ ये बूढ़ा नीम ही काट लें?”
एक आवाज आई…….

> दुनिया वालो से नजरे बचाते, एक दूसरे को कभी भरपूर नज़रो से न देख पाते थे…. लब खामोश ही रहे, लम्बी साँसों में इश्क गाढ़ा होता गया…….

> आधी रात में करवट लिए जब दायें हाथ का तकिया बनता हूँ…. कान ठीक वहीँ होता है जहाँ से नब्ज़ जांचता है डॉक्टर….. आज गिना था मैंने, एक मिनट में सत्तर बार वहां से तुम्हारा नाम पुकारती हैं नसे….

> तुम ठीक रहो.. हमारा ठीक होना
तुम्हारे ठीक होने में ही ठीक हो जायेगा… 
(तुम्हारे लिए)
‪#‎गुनगुन‬

> बचपन में जब वो मासूमियत से ये सवाल किया करती थी…… तो मुझसे जवाब देते नही बनता था…. सच तो ये था के उसके सवाल का जवाब मेरे पास था ही नही…. उस छोटे से मासूम लड़के को खुद ही ये कहाँ पता था के वो क्यू हर पल उस मासूम चेहरे को तकता रहता है……

> जहाँ तक याद की हद जाती है, वह तक बस उसकी सूरत नज़र आती है…. ज़िन्दगी शुरू उसके दामन से होती है इसी ख्वाहिश के साथ कि आखिरी हिचकी भी उसके बाहों में आये और कफ़न भी उसका दामन बने……

> उस रात शॉल ओढ़े निकला था अधूरा चाँद भी दिसंबर की जिस सर्द रात में तन्हाई थी घुली बोहोत क्या तुम भी करवटें बदलती रहीं सेहर होने तक…..?

> क्या उस गली में कभी तेरा जाना हुवा…. जहाँ से ज़माने को गुजरे जमाना हुवा………

> शाम की टहनी पे आ बैठा है घना अँधियारा…रौशनी नए घोसले की तलाश में दूर उड़ चली है….

> तुम्हारा मुझ से दूर रहना मुझे चिढ़चिढ़ा बना देता है…फिर तुम जब लौटती हो तो मेरी ये चिढ़चिढ़ाहट मुझे तुमसे दूर कर देती है | बेहद प्रेम भी दूर होने का कारण बन जाता है कभी कभी | पर क्या करूं ऐसा प्रेम मेरी कमज़ोरी है | फैसला तुम्हारा है | मुझे तो सहने की आदत है |

नोट – ये बिल्कुल काल्पनिक नही है | और तुम अच्छे से ये जानती हो |

> ज़िगर का खून लाया हूँ तेरे सिंगार की खातिर….
हथेली पर रचा लेना ये महेकेगा हिना बन कर…….
‪#‎शायरि७‬

> किसी की नब्ज़ में दौड़ता हुआ लहू बनो….

> कोई नंबर मोबाइल स्क्रीन तक सिर्फ आता है, डायल नहीं होता….क्या किया जाए ?

> ” शर्म नहीं आती? इतनी सी उम्र में चोरी करता है! चल तेरे बाप के पास”
” बाप नहीं है साहब”

> दोनों अलग हुए…. डायरियाँ भरी जाने लगी…. जिस पन्ने पर उनका नाम होता उसे मोड़ा जाने लगा, काश ! वे अपने मन को भी मोड़ पाते…..
> जैसा तुम चाहो…………

> जरूर उसके भीतर उगा होगा एक दरख़्त उदासियों का, इक सांवली-सी लड़की है जो हंसती बहुत है……..

> वे दोनों हमसफ़र नहीं थे मगर दो कदम साथ-साथ चले थे……

> जिसे तुमने कहानी का अंत माना.. वो एक मोड़ भर था किस्से का..
(तुम्हारे लिए)

> बडी-बडी बातें नही, एक उम्मीद के हम मिलेंगे… आज नहीं तो कल… इस नहीं तो किसी और जन्म में…….

> तुम्हारे लिए मेरा ये पागलपन.. किसी दिन जान ले लेगा मेरी…. और… ख़ामोश हो, खो जायेगी मोहब्बत वक़्त के अंधेरों में…..

> ये चांद सारी रात ‘तुम्हें’ मुझमें जगाए रखता है…..

> तुम्हें खुद में जीने की तमाम कोशिशों के बीच जिक्र-ए-खास में तुम्हारे नाम आ गया… अनजाने में वो आखिरी कसम टूट जाने का मलाल है……

> बड़ा सुकून मिलता है लफ़्ज़ों को कागज़ पर उतार कर ..
चीख़ भी लूं तो आवाज़ नहीं होती …..

> स्कूल की उस बेंच पर, मेरे नाम संग जो “नाम” खुरच आया था.. आज भी मौजूद है उस बेंच पर.. “ज़िन्दगी” में कहीं…

> ‘उसकी’ खामोशी में भी उर्दू की मिठास थी जिसे देर तक चखता रहा था वो । ‘उसने’ निगाहों से जो भी कहा ‘उसके’ दिल को छू गया ।

> पता है उस दिन जब तुम्हारा भाई वो पीला लिफाफा देकर गया था, अवाक् सा रह गया था, ऐसा लगा वो अपने साथ मेरी साँसे छीन ले गया…..

> किताब के पन्नों में रखी वो तस्वीर देखकर मासूमियत चेहरे की पढ़ता हूँ…

> लड़की की सच-झूठ की दुनिया की सरहदें मिटने लगी।वो ‘वो’ होने लगी थी जिसकी वो कहानियां लिखती…… एक लड़का किरदार होने लगा था….

> चोखट पर खड़ी हुई थी जिंदगी उसके, और पलंग पर थी मौत, और फिर उसने चलने की एक और नाकाम कोशिश की,पर हाँ कोशिश की…..

> वो कहती थी सुबह सबसे पहले मेरी आवाज सुनना है…..
उसकी शादी कही और हो गयी
मै वादे का पक्का था उसके मोहल्ले का दूधवाला बन गया….

> अंधेरी रात के पहलू में कैसी रौशनाई है….
किसी का दिल ज़रा धड़का, किसी को याद आई है……

> शाम से रास्ता तकता होगा… आज मेरा चांद खिड़की में अकेला होगा……

> उसे इंतजार था…. बारिश आयी और सारी फसल चौपट कर गई। तीन महीने बाद वो फिर से बारिश का इंतजार करेगा……

> सीमेंट से सने हाथ पैर लिए, किसी के सपनों का घर बना कर लौट रहा वो मज़दूर…. ज़रा सी जगह ढूंढेगा फूटपाथ पर, और सो जाएगा….

> वह दूर परदेस में कमाता था।माँ की तबियत खराब होने का ख़त मिलते ही घर को चल पड़ा पर मिलना नीयत में ना था ।पेट की भूख ज़िंदगी भर का टीस दे गयी…..

> ४० मिनट का सफ़र था उसे ४० साल लग गए…. आज जब वो वापस आया तो उसका इंतज़ार करने वाला कोई नहीं था……

> उसे भूख लगी थी, तो उसने बच्चों की कसम खा ली….

> एक बुढापा ठेला खींच रहा था ताकि अंतेिम तीन रोटियां परोसती बहु को थाली सरकाना भार ना लगे…

> वो मुस्कुराकर उसे देख लिया करता, वो भी जवाब मे चुपके से मुस्कुरा देती…..

> खबर किसे होती जब वो खुद ही गुमशुम सा रहने लगा, एक बार मोहब्बत में दिल टूटना क्या होता है उसकी आँखों में पढ़ा था मैंने……

> करवटों के सहारे रात गुजरती थी जिसकी, आँखों में आंसू लेकर उस लड़के ने ताउम्र इंतजार किया अपनी मोहब्बत का…..

> वे दोनों नदी के दोनों किनारे जैसे थे,कहीं चलते-चलते एक दूजे की ओर मुड़ते तो थे पर मिलते कभी नहीं थे…….

> पुरानी नोटबुक के पिछले कुछ पन्ने.. गवाह हैं मेरी अधूरी कहानी के.. वो कहानी जो कभी मेरा सब कुछ थी.. कहानी जो सिर्फ मैं और मेरी नोटबुक जानती है…..

> वो मेहंदी लगवा रही थी. वो भी पास बैठा था.उसकी गोरी हथेलियों पर मेहंदी की कीप बेहद सावधानी से चल रही थी. आसपास भरे बाज़ार से दोनों ही बेसुध थे. हर कुछ देर बाद मेहंदी वाला हाथ उठाता और एक खूबसूरत अक्स उभरता. दोनों एक-दूसरे को देख मुस्कुराने लगते. हाथ आधा ही रचा था मगर वो मेहंदी से उठ रही खुशबू से मदहोश हुई जा रही थी. बच्चों की तरह किलकती हुई अपना हाथ उसे सुंघाने के लिए बार-बार आगे बढ़ाती. यही दोनों का खेल बन गया. अब दोनों वहां नहीं हैं.. कोई और यही खेल खेलता होगा….

> शहर के आख़िरी छोर पर जो गंदा-सा तालाब है न, वहाँ कल रात नीलहंसों के एक जोड़े को देखा. शहर के सारे झील अब मगरमच्छों से भर गए हैं…..

> घाटे का सौदा करने वाले व्यापारी थे तुम….
तुमने मेरे सच्चे प्रेम का गला समाज की दुहाई देकर घोंटा था…..

> “नाराज़ नहीं हूँ और माफ़ी की आवश्यकता नहीं तुम्हें, मुझे कोई शिकायत नहीं तुमसे… तुम परेशान मत हो.. पिछली मुलाक़ात में तुममें बाक़ी बचा मेरा हर हिस्सा वापस ले आया हूँ… हाँ, अपने काजल से तुमने, मेरे कान के पीछे जो काला टीका लगाया था न बस उसे ही छोड़ आया हूँ… यूं तो अब उसकी ज़रूरत नहीं मुझे… इसलिए बस इतना करना कि साथ देखे गए बाक़ी सपनों को दफ़नाते वक़्त उसे भी मिट्टी में दफ़न कर देना…”

> सवाल ये नहीं कि हम एक साथ रहें। सवाल ये है कि मुझे मालूम रहे कि तुम सचमुच मुझसे प्रेम करते हो तो मैं सिर्फ इसी सहारे भी जी सकती हूँ। लड़की बोल रही थी लड़का सिर झुकाये बैठा था खामोशी के साथ….
‪#‎महोब्बत२०१५‬

> तुम्‍हे देखा…मेरी ऊंगलियों ने रचने का हुनर सीख लिया… तुम्‍हारी कर्ज़दार हैं ये… इन्‍हें थाम लो या जब कहोगे थम जायेंगी ये…..

> तुम्‍हारे चले जाने के बाद…तुम्‍हे सोचना….मानाे अपनी ही कब्र की दीवार से लगे बैठा हूं…

> वो खिलौने बेचने वाला जब शाम को घर जाता होगा ….
जाने अपने बच्चों के लिए क्या ले जाता होगा….

> अब कैसे कहूँ, हिचकी आती है तो पानी नहीं पीता…
तुम्हें याद करने का बहाना है.
जब आख़िरी आएगी, तब गंगाजल पिला देना……..

> मेरे शब्दों में कैद हैं कागजों पर कई चेहरे……

> मेरी आँखों की सुर्खी देख कर कहने लगे हैं लोग,
“लगता है तेरा प्यार तुझे आजमाता बहुत है”….
(तुम्हारे लिए)

> कभी तो शायद ऐसा कुछ लिख पाऊंगा…बिल्‍कुल तुम्‍हारे जैसा…कि अशहार मेरे कोई पढ़ेगा तो लफ़्ज़ों से तुम छनोगी…

> तू मुझसे दूर कहाँ है, तू तो हर पल मेरे पास है………

> रेल की सवारी, रिजर्वेशन वाला डब्बा, वो दोस्तों की जिद एक शायरी सुनाता है… सब उसको देखने लगते है.. वो बार-बार उसको देखती है…… गाड़ी आउट सिग्नल पर रुकी है.. लड़का खामोश बैठा है और लड़की को अब उतर जाना है……..

> कभी याद आईने में, कभी याद सिरहाने… कितना असान है मुझे, इधर उधर करना….
” है , ना ”

> कोई पुछ रहा हे मुजसे मेरी जीन्दगी की कीमंत…. मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना……

> कभी वो जागती थी रात भर मुझे msg करने के लिए…

> ना रोको मुझे दर्द लिखने से,
आज या दर्द रोयेगा या दर्द देने वाला……

> हकीकत में ये ख़ामोशी हमेशा चुप नही होती…
कभी तुम गौर से सुनना बहुत किस्से सुनती है…

> मोहब्बत में कभी जज़्बात का सौदा नहीं करते ……

> चांद हल्का सा झुका देखा है अभी // तुम यूं ही धीमे से मुस्कुराया करो………

> पिघल-पिघलकर गले से उतरेगी आखिरी बूँद दर्द की जब मैं साँस की आखिरी गिरह को भी खोल दूँगा…

> तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान,
दिल तड़पता रहा, हम मिटाते रहे…
ख़त लिखे थे जो तुमने कभी प्यार में,
उसको पढते रहे और जलाते रहे….”

> तन्हाई की दीवारो पे घुटन का पर्दा झूल रहा है…
बेबसी की छत के नीचे,कोई किसी को भूल रहा है….

> “विदा होते-होते और विदा करते-करते काफी वक्त हो गया है लेकिन इससे उपजने वाले भावों से मुझे मुक्ति अभी तक नहीं मिली…..”

> मैंने दबी आवाज़ में पूछा – “मुहब्बत करने लगी हो?”
नज़रें झुका कर वो बोली थी – “बहुत”

> वो सभी लिखते हैं…इसलिए नहीं कि उन्हें कुछ पाना है…वो सब इसलिए लिखते हैं क्‍योंकि उन्होंने खोया है सब कुछ…

> इस इश्क़ का हिसाब उस दिन देना जब मेरी ज़िन्दगी मेरी मौत का मातम मनाएगी…….

> तुम्‍हारी मेहराबों पर हर शाम उड़ने वाली इन अबाबीलों से लेकर हर पहर तुम्‍हारे इन बहने वाले आंसुओं का ज़िम्‍मेवार मै ही हूं.. जानता हूं………….

> मुझे हवाओं से घूंघट उठाना नहीं आता, एक दफ़ा तेरे चेहरे से कुछ सरकाया था तो अब ये उम्र नशे मे ग़ुज़र रही है…

> जितना ही तुम ज़ख्‍़म कुरेदोगे, उतना ही लहू टपकाऊंगा।

> इश्क़ में अगर मौत नज़र आए तो क्या कीजिए ?
पास जाकर गले मिलिये और मुस्कुरा दीजिये………

> कभी तो चाँद खिलेगा तेरी हथेली पर…

> जिसे ले गई अभी हवा, वो वरक़ था दिल की किताब का,
कहीँ आँसुओं से मिटा हुआ, कहीं, आँसुओं से लिखा हुआ….

> वही ख़त के जिसपे जगह-जगह, दो महकते होटों के चाँद थे,
किसी भूले बिसरे से ताक़ पर तहे-गर्द होगा दबा हुआ……

> तुम्हारे “कैसे हो” का कितना लंबा जवाब है मेरे पास..

> शब्दों को जोड़-जोड़ के कुछ पंक्तियाँ काव्य की रचता गया… तुम क्या जानो प्रिय, मध्य इस सृजन के कितना टूटा हूँ मैं…

> अगले जन्म में मै तुमसे फिर मिलूँगा…
किसी खेल में, या व्यापार में..
तब होगा प्रेम का हिसाब, मै गणित सीख लूँगा तब तक………

> अब नहीं रखना चाहता याद अपने अतीत और गुजरे कल को….
पुन: तलाश करना चाहता हूँ वर्तमान मे अपनी पहचान बनाने के लिए एक नाम की…
हाँ… एक नाम की……….

> आसमा से जो टपकी हैं दो बूंदे… मुझे तेरे गीले बालों को झटकना याद आ गया…

> न मैं था… न मैं हूँ… न मैं रहूँगा… तुम्हारे बगैर……..

> एक चाहने वाला ऐसा हो… जो बिलकुल मेरे जैसा हो…

> ख्वाबो का रंग… आसमां में… तुमसा…. बस तुमसा.. धडक रहा है…..

> रात के आईने में… कोई चाँद बनकर झांकता है ….

> इस धागे से क्यों बाँधना चाहती हो ? ताकि हमारी दोस्ती में एक धागे सी दूरी हमेशा रहे ? ‪#‎लप्रेक‬

> तुम्हारा हाथ थामकर समाज की परम्पराओं
से बगावत कर बैठूं या
विदा होकर तुमसे… सारी उमर आंसुओ की व्यथा लिखते हम मैं और तुम ???

> ’चाँद’ मैं तू धरती है, मंज़िल मेरी…
तेरे ही परिधि पर घूमता रहता हूँ मैं….

> कभी रुमाल मांगा था उसने… चेहरे से बारिश की कुछ बूँदे पोंछने के लिए… वो मौसम अभी.. अलमारी.. में संभाल रखा है……

> कभी फुर्सत मिले तो सोचना जरूर,
एक लापरवाह लड़का क्यों तेरी परवाह करता था….

> ज़र्रे ज़र्रे से निकली थी अजब आवाज़ें…
सब से लड़ने के लिए इश्क अकेला निकला…..

> शादी जिस्म बेचने और खरीदने का वो पेशा है जिसे कानून और समाज की हिमायत हासिल है.
– बाज़ार

> कभी मेरी याद में आंशू आ जायें तो तुम रो लेना….
मिलना किस्मत में ना था अपने तो हम मिल ना सके…
जो किस्मत में है तुम्हारे तुम उसी के हो लेना…

> एक दम तन्हा हूं मैं, अकेला हूं, तुम बिन कुछ नहीं मैं…

> कभी तो शायद ऐसा कुछ लिख पाऊंगा कि जिससे पहचाना जाऊंगा और ये दुनिया मुझे याद रखेगी…

> बन्द कर लूं आंखे तो एक उसी का चेहरा मुझे नजर आता है…
मुझसे थोड़ा दूर वो गुजरा हुआ कल जाने दो मै सो जाउंगा….

> अभी तो मेरा जी भी नहीं भरा महोब्बत से, कैसे सो जाउं मै…
परवाने को शमा में थोड़ा और जल जाने दो मैं सो जाउंगा…

> आंशू आंखों से मेरे जाने कहां गुम हैं, कोई बता दे मुझे…
मै अभी पत्थर हूं, थोड़ा पिघल जाने दे सो जाउंगा……..

> अभी तो पी भी नहीं शराब, मगर नशा सा हो रहा है…
बेहाश हूं मै अभी, थोड़ा संभल जाने दो सो जाउंगा…..

> अभी बाकी है रात, और थोड़ा ढल जाने दो मै सो जाउंगा…
अभी बाकी है दर्द, कागज पर निकल जाने दो मै सो जाउंगा…

> डायरी के बारहवें पन्ने पर एक उदास सी ग़ज़ल है …. कभी कभी हाथों में ले कर , उसे हँसाने की कोशिश करता हूँ ….

> इस शाम भी तेरी याद रही, ये शाम बड़ी गुलज़ार रही….
अब सुबह का रोना कौन कहे, जब सुबह वो होगी देखेंगे….

> “वो देख रही है तुझको” ->>
बस इतना कह कर मुझे सातवे आसमान की उड़ान पर भेजने वाले दोस्तों को भी मेरा सलाम… उन सबको भी भगवान खुश रखे…….

> लिखो उस पहर जब शब्द सबसे बेहतर तरीके से आवारा हों……..

> जिंदगी के जिन रास्तों पर तलुवे मेरे छिल रहे है…
उसी रास्ते पर पिताजी कईयों मील गये थे…………

> जब वो साथ था तो हमारे लिए बकवास था…
आज वो दुर है,, तो हमारे लिए वो ही कोहिनुर है….

> गम मे वो शराब पीते है…
और वो पीती है अश्क अपने…!!

> मेहँदी वाले हाथों के कन्धों से
दुपट्टा सरकना,
आफतें क्या क्या..!!

> शायर बनना बहुत आसान है…
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए…

> 11/- रूपये की नींद देगा कोई ?

> यदि आपको लगता है, आप जिसे इश्क़ करते हो वो भी आपके मजे ना लेकर आपसे इश्क़ ही करेगा तो सच्ची पुत्तर जी, आप न वड्डे वाले क्यूट हो

> चंद रातों के खुवाब
उम्र भर की नींद मांगते है।।

> यादों की अलमारी में देखा, वहां मुहब्बत फटेहाल लटक रही है

> एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद..
दूसरा सपना देखने के हौसले को ‘ज़िंदगी’ कहते हैं..

> वो भी कैसा वक़्त था क्या हसीन घड़ी थी …
शरमाई सी मुस्कुरा रही तुम मेरे सामने खड़ी थी ….

> जरा धीरे से.. धडकने कोई सुन रहा होगा….

> चलते हैं महादेव ….
”चलो चलते है … फिर मुलाकात होगी कभी किसी मोड पर ….
अब तक के सफर के लिए शुक्रिया ….”

> “कम–से–कम बैग के नीचे से मेरा हाथ तो थामे रह सकते थे .. बुजदिल …
तुम मेरी कम दुनिया की फ़िक्र ज्यादा करते हो” ….
‪#‎गाँवकागवांर‬

> तुम्हारी तस्वीर, मेरे फ़ोन के म्यूजिक प्लेयर में ठसे Sad Song … और कुछ हमारे बातचीत के Audio ….
रातें अब यूं ही गुजरती हैं ………

> औरत ‘प्रेम’ तो ले आती है मगर उस प्रेम पर ‘विश्वास’ मर्द को ही लाना होता है और ‘विश्वास’ के अभाव में ‘प्रेम’ कभी सफल नहीं हो सकता ….

> मन में आता है के सब कुछ छोड़ कर सन्यासी हो जाऊ … फिर उस
लड़की का ख़याल आ जाता ह जो मुझे पति रूप में पाने के लिए 16 सोमवार का व्रत कर रही होगी …

> हमसफ़र की तरह ज़िन्दगी के सफ़र में …..
“मेरा साथ देने का” उसने वादा किया था ……

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